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सोने से पहले की कहानी · 4–8 वर्ष

लीला और बगीचे का गीत

एक छोटा घोंघा सीखता है कि रात का गीत पत्तों की सरसराहट, एक बूँद और दोस्त की धीमी आवाज़ से बन सकता है।

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सूर्यास्त में फूल के नीचे अपने गर्म घर के बाहर लीला बगीचे को सुनती है

सूर्यास्त का दरवाज़ा

बगीचा सुनहरा हुआ तो पक्षियों ने अपने गीत सुबह तक के लिए समेट लिए। घोंघा लीला ने सफेद घंटी जैसे फूल के नीचे अपने घर की गोल खिड़की को चमकते देखा। अंदर मुलायम पत्ते की चादर उसका इंतज़ार कर रही थी।

“सोते समय मुझे एक गीत चाहिए,” उसने सोचा। “पर मैं पक्षी की तरह नहीं गा सकती।” उसने पीला मफलर ठीक किया और सुनने बाहर निकली।

पत्तों की सरसराहट

रास्ते के पास हवा ने पत्तों को छुआ: श्श्श, श्श्श। लीला ने अपने लंबे डंठलों पर आँखें उठाईं। सरसराहट हल्की थी, जैसे बगीचे में मुलायम फीता खिंच रहा हो।

उसने अपनी बहुत छोटी “श्श्श” बनाई। आवाज़ बिल्कुल वैसी नहीं थी, पर उसे मुस्कान आई। हवा रुकी तो लीला ने इंतज़ार किया। जल्द पत्ते फिर बोलने लगे।

लीला और साही ब्रैम फर्न के नीचे बूँदें सुनते हैं

एक-एक बूँद

साही ब्रैम फर्न के नीचे बैठा था। दोपहर की बारिश की कुछ बूँदें उसके हरे पत्तों पर थीं। एक चौड़े पत्ते पर गिरी: टप। फिर दूसरी: टप।

“क्या तुम उन्हें गिन रहे हो?” लीला ने पूछा। “आज नहीं। मैं हर बूँद सुन रहा हूँ,” ब्रैम बोला। लीला उसके पास बैठ गई। बूँदों के बीच चुप रहने के लिए बहुत जगह थी।

छोटी शुरुआत

लीला ने हवा और सारी बूँदें एक साथ याद रखने की कोशिश की। उसकी छोटी धुन उलझ गई। “मुझे लगता है गीत खो गया,” वह बोली।

ब्रैम ने धीरे सिर हिलाया। “एक आवाज़ से शुरू कर सकती हो। पूरा बगीचा गाना ज़रूरी नहीं।” लीला ने “श्श्श” फुसफुसाया, रुकी और एक धीमा “टप” जोड़ा। शुरुआत के लिए इतना काफी था।

लीला और मेंढक मो चाँदनी वाले शांत तालाब के पास बैठे हैं

तालाब पर मो

तालाब में दो कमल-पत्तों के बीच पहला तारा चमक रहा था। मेंढक मो चिकने पत्थर पर आराम कर रहा था। लीला पास की सूखी काई पर रुकी।

“मुझे दो छोटी आवाज़ें मिलीं,” उसने बताया। “एक और चाहिए?” मो ने पूछा। उसने बहुत धीरे टर्र की। लीला ने तुरंत नकल करने की कोशिश किए बिना सुना। पानी पर छोटी लहरें फैल गईं।

तारों के लिए जगह

मो ने तुरंत फिर आवाज़ नहीं की। वह लहरों को किनारे पहुँचते देखता रहा। लीला ने भी देखा। तालाब के ऊपर एक और तारा आ गया।

“क्या यह विराम भी गीत का हिस्सा है?” उसने पूछा। “बिल्कुल,” मो बोला। “गीत सुनने के लिए जगह छोड़ सकता है।” लीला को यह बात अच्छी लगी। हर शांत पल को आवाज़ से भरना ज़रूरी नहीं था।

तारों के नीचे अपने आरामदायक घर में लीला पत्ते की चादर ओढ़कर आराम करती है

तीन छोटी आवाज़ें

घर लौटते समय धुन धीरे-धीरे लीला के साथ चली। पत्तों के लिए फुसफुसाहट। बूँद के लिए टप। मो के लिए धीमा स्वर। उनके बीच उसने छोटी जगहें छोड़ीं।

उसने बगीचे से कुछ छीना नहीं था। पत्ते अब भी हवा के साथ थे, तालाब अपनी लहरों के साथ। लीला ने बस सबको शुभ रात्रि कहने का अपना तरीका खोज लिया था।

बगीचा आराम करे

लीला पत्ते की चादर के नीचे लेट गई। उसका हरा खोल तकिए के पास आराम से था। खुली खिड़की से आखिरी सरसराहट आई। उसने एक छोटी “श्श्श” से जवाब दिया।

उसके गीत को तेज़ होने की ज़रूरत नहीं थी। एक और स्वर भी नहीं चाहिए था। बगीचा आराम कर रहा था और लीला भी आराम कर सकती थी। उसकी आँखों के डंठल धीरे झुक गए। बाहर तारे शांत जगहों पर चमकते रहे।

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देखें और सीखें

नए शब्द

सरसराहटपत्ते या कागज़ हिलने की धीमी आवाज़
विरामदो बातों या आवाज़ों के बीच थोड़ा रुकना
धुनमिलकर छोटा गीत बनाने वाली आवाज़ें
लहरेंपानी पर फैलती छोटी तरंगें

साथ सोचें

पढ़ने के बाद बात करें

  1. बहुत सारी आवाज़ें याद करने की कोशिश में लीला की किसने मदद की?
  2. मो ने अपने गीत में विराम क्यों छोड़ा?
  3. अपने रात के गीत के लिए कौन-सी धीमी आवाज़ चुनोगे?
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